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राज्य सरकार ने अपनी नाकामियों का ग़ुस्सा पत्रकारों पर उतारा.पत्रकारों और छायाकारों को राइफ़ल के कुंदे से मारा. कई अन्य पत्रकार भी ज़ख़्मी...

रांची: झारखण्ड के पत्रकारों का सबसे  बड़ी संस्था रांची प्रेस क्लब ने गुरुवार को राज्य स्थापना दिवस समारोह के दौरान यहां मोराबादी मैदान में आयोजित पारा शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन की तस्वीर लेने वाले छायाकारों -पत्रकारों पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज कर तस्वीर जबरन डिलीट करने की घटना की घोर निंदा की है।
रांची प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि स्थापना दिवस समारोह के दौरान राज्य सरकार से नाराज पारा शिक्षकों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था जिसकी तस्वीर रूटीन कार्य कर रहे कैमरामैन एव फोटोग्राफरों को जबरन कब्जे में करना,उन्हें कार्य से रोकना लोकशाही में तानाशाही जैसा कदम है.तस्वीरें उतरने और समाचार संकलन पत्रकारिता के पेशे का हिस्सा है,इन्हें कौन बताये इसमें गलत क्या है। तस्वीर लेने के कारण कैमरामैन बैजनाथ महतो, फोटोग्राफर -सह- रांची प्रेस क्लब के मैनेजिंग कमिटी के सदस्य पिन्टू दूबे, फोटोग्राफर विनय मुर्मू तथा मुकेश भट्ट की पुलिस द्वारा बर्बरता से पिटाई कर घायल करने के बाद सभी तस्वीरों को कैमरा से मिटाने के साथ रिपोर्टिंग कर रहे संवाददाता राजेश तिवारी, इमरान एवं कमलेश सहित दर्जनों पत्रकारों को चोटिल किये जाने एवं कैमरा तोड़े जाने की घटना की रांची प्रेस क्लब घोर निंदा करती है.इस कायरता पूर्ण घटना की जितनी भी निंदा की जाय कम है, यह घटना सीधे सीधे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। क्लब के पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की है कि लाठी चार्ज में घायल मीडियाकर्मियों का सरकार बेहतर इलाज कराये तथा उन्हें क्षतिपूर्ति दे। इस घटना के लिए दोषी पुलिसकर्मियों एवं अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाय। निंदा करने वालों में प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोरेन, महासचिव शंभू नाथ चौधरी, संयुक्त सचिव आनंद कुमार, कोषाध्यक्ष प्रदीप सिंह, मैनेजिंग कमिटी के सदस्य गिरिजा शंकर ओझा, अमित अखौरी, चंचल भट्टाचार्य, प्रशांत सिंह, सत्यप्रकाश पाठक, जयशंकर, सोहन सिंह, आसिया नाजली एवं संजय रंजन शामिल हैं ।

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