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कोरोना वायरस के टेस्ट के मामले में तमिलनाडु से भी आगे निकला महाराष्ट्र

दिल्ली : कोरोना वायरस के टेस्ट  के मामले में तमिलनाडु महाराष्ट्र से भी आगे निकल चुका है और इसी के साथ सूबे में संक्रमितों की संख्या  भी तेजी से बढ़ी है। अब तमिलनाडु सबसे ज्यादा कोविड-19 के मामले में महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली के बाद चौथे पायदान पर पहुंच गया है। केसों की इतनी तेजी से बढ़ती संख्या चिंता की बात है लेकिन यह इस ओर भी इशारा करता है कि शायद टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ने से केस भी तेजी से सामने आने लगे हैं।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली टेस्टिंग के मामले में पूरे देश में अव्वल है। यहां प्रति 10 लाख आबादी पर 4,062 टेस्ट हुए हैं। यहां भी टेस्टिंग बढ़ने के साथ नए मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले चार दिनों में दिल्ली में 1600 से ज्यादा केस बढ़ चुके हैं। देश में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले कई दिनों से हर दिन 3 हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इसे भी टेस्टिंग बढ़ने का नतीजा कहा जा सकता है क्योंकि अब हर दिन 80 हजार से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं।देश में सबसे ज्यादा टेस्टिंग वाले 5 राज्यों में क्रमशः दिल्ली, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश हैं। दिल्ली में जहां प्रति 10 लाख आबादी पर 4,062 टेस्ट हुए हैं, वहीं तमिलनाडु में 2806, राजस्थान में 2122, महाराष्ट्र में 1798 और आंध्र प्रदेश में 1766 टेस्ट हुए हैं।

पश्चिम बंगाल का उदाहरण
इसी तरह, जहां टेस्टिंग कम हो रही है, वहां नए मामले भी कम आ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर पश्चिम बंगाल को देख सकते हैं जिसकी कम टेस्टिंग की वजह से काफी आलोचनाएं हो रही हैं। पश्चिम बंगाल में प्रति 10 लाख आबादी पर 358 टेस्ट ही हो रहे हैं। इस वजह से कई मामले ऐसे भी हो सकते हैं जिनका पता ही नहीं चल पा रहा होगा। यह आशंका इसलिए भी ज्यादा है कि ज्यादातर केस बिना लक्षण वाले सामने आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल में कोरोना का डेथ रेट भी सबसे ज्यादा है जो 13.2 प्रतिशत है।

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फ्लू जैसे लक्षणों या सांस में समस्या पर हो रहा टेस्ट
अभी तक भारत में टेस्टिंग स्ट्रेटिजी वही है जो पहले थी। अभी भी देश में मास टेस्टिंग के बजाय कंटेनमेंट जोन्स में रहने वाले उन लोगों की जांच की जा रही है जिनमें इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों (ILI) के लक्षण दिख रहे हैं या जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है। हालांकि, पंजाब की टेस्टिंग स्ट्रेटिजी से खुलासा हुआ है कि टेस्ट किए जाने वाले ज्यादातर लोग एसिम्पटोमैटिक थे यानी उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। पिछले महीने पंजाब में जितने भी मामलों की पुष्टि हुई थी उनमें 78 प्रतिशत से ज्यादा ऐसे थे, जिनमें इसके कोई लक्षण ही नहीं थे।

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