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नई शिक्षा नीति भाजपा सरकार की निजीकरण और नौकरियों की ठेका प्रथा की नीति : आभा सिन्हा

रांची :
झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी की प्रवक्ता आभा सिन्हा ने कहा है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय तक शिक्षा के व्यवसायीकरण, निजीकरण एवं शिक्षा के मौलिक अधिकारों को कमजोर करने की नीति केे साथ-साथ शिक्षा के प्राइवेटाइजेशन की ओर एक कदम है। अब उच्च शिक्षा आम आदमी की पहुंच से बाहर होने वाली है. अब सैलरी स्ट्रक्चर भी वो नहीं रहेगा, इसमें स्टूडेंट्स की फीस भी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति वर्तमान सरकार की निजीकरण और नौकरियों की ठेका प्रथा की नीति को सामने ले आई है. ये पॉलिसी सार्वजनिक क्षेत्र के विश्वविद्यालयों की कीमत निजी और विदेशी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देने वाली नीति है. इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक न्याय पर आक्रमण होगा। इससे छात्रों के लिए शिक्षा महंगी हो जाएगी. दलित, आदिवासी महिला पछिड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर छात्र उच्च शिक्षा के दरवाजों तक पहुंच ही नहीं पाएंगे।
उन्होंने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने नई शिक्षा नीति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को योजना आयोग की ही तर्ज पर समाप्त कर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त कर दी है। शिक्षा के जनतांत्रिक चरित्र को समाप्त कर सत्ता केंद्रित अधिकारों का केंद्रीकरण कर दिया गया है। अभी तक भारत के संविधान में शिक्षा समवर्ती सूची में रहने के कारण राज्य का विषय था लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार राज्य की संवैधानिक स्वायत्तता का अपहरण कर रही है।  
उन्होंने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार देश की जनता को छलने का काम कर रहे हैं। जब उच्च शिक्षा का निजीकरण होगा तो उच्च शिक्षा मंहगी भी हो जाएगी और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला, दलित वर्ग शिक्षा से वंचित होंगे। क्या केन्द्र की भाजपा सरकार एक साधारण, मध्यम, निम्न मध्यम वर्ग के परिवार वाले लड़की को दस लाख रुपये फीस देकर पढ़ाई करा पाएंगे. आज हर बोर्ड में बेटियां टॉप कर रही हैं, वो सब अब देखने को शायद न मिले।
उन्होंने कहा कि शिक्षा बजट में सरकार का अनुदान बढ़ना चाहिए था जो कि घट रहा है. सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि सामाजिक परिवर्तन हो, लेकिन इस तरह की शिक्षा नीति से जो अमीर है वो और अमीर होगा और गरीब हमेशा गरीब ही रह जायेगा, जिससे सामाजिक बदलाव ठप हो जायेगा।
श्रीमती सिन्हा ने कहा कि देश की शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए जिसमें शिक्षा पर बजट का दसवां हिस्सा खर्च हो और देश के अंदर समान शिक्षा प्रणाली लागू हो। चाहे वह अमीर का बच्चा हो अथवा गरीब का, सबों को एक समान शिक्षा मिलनी चाहिए।

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