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देश के प्रमुख मंदिरों की तरह दमकेगा महाकाल मंदिर

उज्जैन : उज्जैन का महाकाल मंदिर भी अब जल्द ही देश के अन्य प्रमुख मंदिरों की तरह दमकेगा। यहां आकर्षक और अत्याधुनिक रोशनी लगाई जाएगी तो वहीं इसके लिए देश की विभिन्न नामी गिरामी कंपनियों ने मंदिर प्रशासन के समख प्रेजेंटेशन भी दिया है। यदि प्रोजेक्ट स्वीकृत हो जाता है तो मंदिर परिसर में कहीं फूल तो कहीं फव्वारे भी नजर आएंगे।


महाकालेश्वर मंदिर में अत्याधुनिक विद्युत सज्जा की शुरुआत एक महीने बाद हो सकती है। इसके लिए बिजली उपकरण और तकनीकी विकसित करने वाली देश की 9 नामी कंपनियों ने अधिकारियों के सामने नई तकनीकियों का दो दिन प्रदर्शन किया। अब अधिकारी अलग-अलग तकनीकी में से मंदिर के लिए उपयुक्त तकनीकी का चयन करेंगें। मथुरा के प्रेम मंदिर, गुजरात के सोमनाथ व देश के अन्य कई मंदिरों की विद्युत सज्जा पर्यटकों को लुभाती है।


लोग इन मंदिरों की लाइटिंग और वहां लाइट एंड साउंड शो, लेजर शो आदि देखने जाते हैं। इसी तरह की व्यवस्था महाकाल मंदिर में भी की जा रही है। स्मार्ट सिटी ने महाकाल मंदिर की विद्युत सज्जा के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे। फिलिप्स, जगुआर, सूर्या, विप्रो, हेवल्स, बजाज, स्पार्क, लाइटिंग टेक्नोलॉजी, गायत्री इलेक्ट्रॉनिक्स ने प्रेजेंटेशन दिया। इस प्रोजेक्ट पर 3 से 5 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। प्रशासक एसएस रावत कहते हैं कि महाकाल मंदिर को आकर्षक बनाने के क्रम में स्मार्ट सिटी के माध्यम से यह काम कराया जाएगा। कंपनियों के प्रजेंटेशन में बताया गया मंदिर के खुले चौगान में फर्श पर लाइटिंग से फूलों की बिसात, पानी बहने जैसे इफेक्ट्स भी दिए जा सकते हैं। परिसर में घूम रहे लोगों को लाइट इफेक्ट्स से चौंकाया जा सकता है।

संध्या और शयन आरती के दौरान मंदिर की लाइटिंग आरती के स्वरों के साथ इफेक्ट्स देगी। साउंड के साथ लाइटिंग के इफेक्ट्स बदलेंगे।

विशेष दिनों में फसाड लाइटिंग का अलग इफेक्ट रहेगा। यानी 15 अगस्त पर तिरंगी लाइटिंग, महिला दिवस पर पिंक लाइटिंग, इसी तरह शिवरात्रि, श्रावण, नागपंचमी जैसे पर्वों की अलग लाइटिंग होगी महाकाल शिखर सबसे अलग दिखेगा, अन्य मंदिरों के शिखर और स्ट्रक्चर पर अलग लाइटिंग दिखेगी, इससे मुख्य मंदिर की अलग पहचान रहेगी। कोटितीर्थ कुंड पर अलग तरह की लाइटिंग होगी। आसपास के मंदिरों व पानी में भी लाइट के इफेक्ट दिखाई देंगे। स्मार्ट सिटी सीईओ जितेंद्रसिंह चौहान के अनुसार कंपनियों के प्रजेंटेशन देखे हैं। मंदिर का सर्वे कर तय करेंगे कि कहां कौन सी लाइटिंग हो सकती है, किस तकनीकी का अपयोग होगा।

यह तकनीकी ला सकेंगे

डिजिटल मल्टी प्लेक्सिंग- विशेष दिनों पर होने वाली लाइटिंग फिक्स रहेगी, आरती, पूजन और अन्य अवसर पर इफेक्ट्स तय रहेंगे।

डीएमएक्स- इससे लाइट कंट्रोल होती है। शाम होते ही ऑटोमेटिक लाइट चालू हो जाएगी। इसका नियंत्रण कमांड सेंटर के अलावा अधिकारी मोबाइल से कर सकेंगे।

गोगो प्रोजेक्शन- इसमें फर्श पर विभिन्न इफेक्ट्स डाले जा सकते हैं।

मोनोक्रोमिक- शिखर पर लाइटिंग होगी।

डायनामिक- परिसर के अन्य मंदिरों व शिखरों पर लाइटिंग होगी।

आरजीबी व आरजीडब्ल्यू- कई तरह के रंग वाली लाइटिंग इफेक्ट्स बनेंगे।

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